Unlock 2.0 guidelines in Hindi : केंद्र सरकार की ओर से जारी अनलॉक 2.0 की गाइडलाइंस 31 जुलाई तक जारी रहेंगी। कंटेनमेंट जोन के बाहर, लगभग सभी गतिविधियों की छूट दे दी गई है।

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों (Coronavirus cases)के बीच देश अनलॉक 2.0 की ओर बढ़ गया है। जैसी उम्‍मीद थी, नई Unlock 2.0 गाइडलाइंस में कुछ राहत जरूर मिली है मगर बहुत सी गतिविधियां अब भी प्रतिबंधित हैं।

Unlock 2.0 Guideline

क्या खुलेगा और क्या नहीं सरकार ने जारी की अनलॉक 2.0 की गाइडलाइन्स ?

स्कूल-कॉलेज और कोचिंग इंस्टीट्यूट 31 जुलाई तक बंद रहेंगे, लेकिन 15 जुलाई से सरकारी ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट खुल सकेंगे, मेट्रो सर्विस, सिनेमा हॉल, स्वीमिंग पूल, थिएटर और बार बंद रहेंगे केंद्र और राज्य सरकार के ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट खोलने के लिए SOP जारी होगी

अनलॉक-1 के बाद अनलॉक-2 की तस्वीर साफ हो गई है। उम्मीद थी कि इंटरनेशनल फ्लाइट्स या स्कूल-कॉलेजों पर कोई फैसला हो सकता है, लेकिन सोमवार को जारी हुई अनलॉक के दूसरे फेज की गाइडलाइन में इन्हें बंद ही रखने का फैसला लिया गया है। अनलॉक-1 की गाइडलाइन 7 पन्नों की थी। इस बार संख्या कम हो गई। मुख्य आदेश 4 पन्नों का ही है।


अब सरकार के आदेश को इस नजर से देखते हैं…


Q-क्या पूरे देश में अनलॉक-2 लागू होगा?
Answer-नहीं। कंटेनमेंट जोन में 31 जुलाई तक लॉकडाउन जारी रहेगा।


इस बार क्या क्या नया अनलॉक हुआ ?


1. ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स खुलेंगे, लेकिन सिर्फ सरकारी

केंद्र और राज्य सरकारों के ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स 15 जुलाई से खुल सकेंगे, लेकिन स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के साथ। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल और ट्रेनिंग की तरफ से आने वाले दिनों में एसओपी जारी होगी।


2. दुकानों पर ज्यादा लोगों को इजाजत

Unlock 2.0

अलग-अलग इलाकों के हिसाब से दुकानों पर एक वक्त में 5 से ज्यादा लोगों को एंट्री दी जा सकेगी। हालांकि, इसमें जगह के मुताबिक सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना होगा।


3. नाइट कर्फ्यू में एक और घंटे की पाबंदी हटी

पिछली बार रात 9 से सुबह 5 बजे तक बाहर निकलने पर पाबंदी थी। इस बार एक घंटे की ज्यादा मोहलत दी गई है। अनलॉक-2 में रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक घर से बाहर नहीं निकल सकेंगे। यानी रात को एक घंटे ज्यादा बाहर रह सकेंगे। नाइट कर्फ्यू की टाइमिंग थोड़ी राहत देते हुए इसका समय एक घंटे कम कर दिया गया है। अब रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक जरूरी गतिविधियों को छोड़कर बाहर निकलने पर रोक रहेगी।

इस बार जरूरी सेवाओं के अलावा कंपनियों में शिफ्टों में काम करने वालों, नेशनल और स्टेट हाईवे पर सामान ले जाने वाली गाड़ियों, कार्गो की लोडिंग और अनलोडिंग को नाइट कर्फ्यू में छूट दी गई है।


4. घरेलू उड़ानों और ट्रेनों में और इजाफा होगा

Unlock 2.0

नई गाइडलाइन में सरकार ने कहा है कि घरेलू उड़ानों और पैसेंजर ट्रेनों को अब सीमित तरीके से चलाया जा रहा है। इनमें और इजाफा किया जाएगा।


5. कॉमन पॉइंट जो हर गाइडलाइन में कही जाती हैं…
  • 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों, पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों, गर्भवती महिलाओं और 10 साल से कम उम्र के बच्चों को जरूरी और मेडिकल जरूरतों को छोड़कर घर पर रहने की सलाह दी जाती है।
  • दफ्तरों और कामकाज की जगहों पर सुरक्षा के लिए इम्प्लॉयर की यह ‘श्रेष्ठ कोशिशें’ रहनी चाहिए कि सभी कर्मचारियों के मोबाइल फोन में आरोग्य सेतु ऐप इंस्टॉल हो।
  • कंटेनमेंट जोन में सिर्फ जरूरी सेवाओं की इजाजत दी जाएगी।
  • राज्य सरकारें कंटेनमेंट जोन के बाहर बफर जोन की पहचान भी कर सकेंगी। ये ऐसे इलाके होंगे, जहां नए मामले आने का खतरा ज्यादा है। बफर जोन के अंदर भी प्रतिबंधों को जारी रखा जा सकता है।
  • अपने क्षेत्रों में हालात का जायजा लेने के बाद राज्य सरकारें कंटेनमेंट जोन के बाहर कुछ गतिविधियों को बैन कर सकती हैं या जरूरी लगने पर प्रतिबंधों को लागू कर सकती हैं।
  • पब्लिक प्लेस पर मास्क और 2 गज की दूरी जरूरी है।
  • शादियों में 50 और अंतिम संस्कार में 20 से ज्यादा लोग शामिल नहीं हो सकेंगे।

गिलोय (अंग्रेज़ी:-टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया) की एक बहुवर्षिय लता होती है। इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं। आयुर्वेद में इसको कई नामों से जाना जाता है यथा अमृता, गुडुची, छिन्नरुहा, चक्रांगी, आदि। 'बहुवर्षायु तथा अमृत के समान गुणकारी होने से इसका नाम अमृता है।' आयुर्वेद साहित्य में इसे ज्वर की महान औषधि माना गया है एवं जीवन्तिका नाम दिया गया है। गिलोय की लता जंगलों, खेतों की मेड़ों, पहाड़ों की चट्टानों आदि स्थानों पर सामान्यतः कुण्डलाकार चढ़ती पाई जाती है। नीम, आम्र के वृक्ष के आस-पास भी यह मिलती है। जिस वृक्ष को यह अपना आधार बनाती है, उसके गुण भी इसमें समाहित रहते हैं। इस दृष्टि से नीम पर चढ़ी गिलोय श्रेष्ठ औषधि मानी जाती है। इसका काण्ड छोटी अंगुली से लेकर अंगूठे जितना मोटा होता है। बहुत पुरानी गिलोय में यह बाहु जैसा मोटा भी हो सकता है। इसमें से स्थान-स्थान पर जड़ें निकलकर नीचे की ओर झूलती रहती हैं। चट्टानों अथवा खेतों की मेड़ों पर जड़ें जमीन में घुसकर अन्य लताओं को जन्म देती हैं।

गिलोय के पत्ते स्वाद में कसैले, कड़वे और तीखे होते हैं। गिलोय का उपयोग कर वात-पित्त और कफ को ठीक किया जा सकता है। यह पचने में आसान होती है, भूख बढ़ाती है, साथ ही आंखों के लिए भी लाभकारी होती है। आप गिलोय के इस्तेमाल से प्यास, जलन, डायबिटीज, कुष्ठ और पीलिया रोग में लाभ ले सकते हैं। इसके साथ ही यह वीर्य और बुद्धि बढ़ाती है और बुखार, उलटी, सूखी खाँसी, हिचकी, बवासीर, टीबी, मूत्र रोग में भी प्रयोग की जाती है। महिलाओं की शारीरिक कमजोरी की स्थिति में यह बहुत अधिक लाभ पहुंचाती है।

Giloy

गिलोय के फायदे (Giloy Benefits and Uses)

1. मधुमेह के लिए गिलोय (Giloy For Diabities)
Benefits Of Giloy in Dianetes

गिलोय का डायबिटीज रोग से पीड़ित व्यक्तियो के लिए बुहत लाभकारी है, डायबिटीज के ऐसे मरीज जिन्हें Type -2 डायबिटीज (Type 2-Diabetes) की समस्या है, उन्हें गिलोय के सेवन से काफी लाभ मिल सकता है। गिलोय में काफी मात्रा में Hypoglycaemic Agent पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए अक्सर डॉक्टर गिलोय के जूस का सेवन करने की सलाह देते हैं।

2. इम्यूनिटी बढ़ाए (Immunity Booster)

गिलोय का जूस पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ती है, अगर कोई इंसान लगातार बीमार रहता है तो, इसकी वजह उसकी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता या कमजोर इम्यूनिटी भी हो सकती है। इन समस्याओं की ओर तुरंत ही ध्यान दिया जाना चाहिए। खून को साफ करके, बैक्टीरिया को मारकर, हेल्दी कोशिकाओं को मेंटेन करके, शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़कर इम्यूनिटी को बढ़ाया जा सकता है। ऐसी समस्याओं को दूर करने के लिए समय और पैसे खर्च करने की जगह, आप गिलोय के जूस का सेवन भी शुरू कर सकते हैं।

गिलोय के अन्य फायदों में शामिल है*.
  • गिलोय शरीर में मौजूद टॉक्सिन को निकालता है।
  • गिलोय से नपुंसकता की समस्या को दूर करता है।
  • गिलोय मूत्रनली के संक्रमण को दूर करता है।
  • गिलोय लिवर से जुड़ी बीमारियों से लड़ता है।
3. बुखार में गिलोय (Giloy For Fever)

ऐसे लोग जो जीर्ण ज्वर (Chronic Fever) या अन्य बीमारी से परेशान हैं, उनके लिए गिलोय बेहद फायदेमंद होती है। ऐसा इसके ज्वरनाशक गुणों (Anti-Pyretic Nature) के कारण होता है। ये ब्ल्ड प्लेटलेट्स को बढ़ाने में, जानलेवा बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। डेंगी बुखार की समस्या होने पर भी ये उसके लक्षणों को दूर करता है। गिलोय के सत को थोड़ी मात्रा में शहद के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने पर मलेरिया की समस्या को भी दूर किया जा सकता है।
Benefits of Giloy In Fever

गिलोय अपने ज्वरनाशक गुण के कारण बुखार को कम करने में मदद करता है। आयुर्वेद के अनुसार, उच्च बुखार के दो कारक हैं, पहला अमा और दूसरा कोई बाहरी कण या जीव है। गिलोय अपने दीपन (क्षुधावर्धक) और पचान (पाचन) गुणों के कारण पाचन और अवशोषण में सुधार करके बुखार को कम करने में मदद करता है जो बदले में अमा के गठन को रोकता है। यह अपनी रसायण संपत्ति के कारण बाहरी कणों या जीवों से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा में सुधार करता है।

सुझाव:
1. गिलोय का रस 2-3 चम्मच लें।
2. इसमें उतनी ही मात्रा में पानी मिलाएं और इसे सुबह खाली पेट पीएं।

4. रयूमेटाइड आर्थराइटिस(गठिया) के लिए गिलोय (Giloy For Rheumatoid Arthritis)

रयूमेटाइड आर्थराइटिस को हिंदी में आमवातीय संधिशोथ कहा जाता है। ये एक प्रकार का ऑटो इम्यून गठिया होता है। गिलोय के नियमित सेवन से रयूमेटाइड आर्थराइटिस के कई मरीजों ठीक होते देखा गया है। गिलोय में एंटी ऑर्थराइटिक और एंटी इंफ्लेमेट्री गुण पाए जाते हैं।

रयूमेटाइड आर्थराइटिस के उपचार के लिए गिलोय और अदरक को एक साथ मिलाकर सेवन किया जाता है। जबकि जोड़ों या गठिया के दर्द के उपचार के लिए गिलोय के तने या पाउडर को दूध के साथ उबालकर पीने की सलाह दी जाती है।

5. तनाव से राहत देता है (Stress Relief)
benefits Of Giloy In Stress

गिलोय और अन्य जड़ी-बूटियों से तैयार किया हुआ टॉनिक एंग्जाइटी और स्ट्रेस के लेवल को कम कर सकता है। ये टॉनिक शरीर में मौजूद टॉक्सिन को शरीर से बाहर निकाल देता है। ये शरीर और दिमाग को शांति देने के साथ मेमोरी को भी अच्छा बूस्ट देता है। Stress और मानसिक तनाव दूर करने के लिए गिलोय एक बहुत ही अच्छा आयुर्वेदिक herb है। Stress को कम करने के लिए आप योग का भी सहारा ले सकते है।

6. पीलिया को ठीक करता है (Cure For Jaundice)

अगर कोई व्यक्ति पीलिया की बीमारी से परेशान है तो आप उसे गिलोय का सेवन का सुझाव सकते हैं। गिलोय के ताजा 20-30 पत्ते लेकर पीस लें। एक गिलास ताजी छांछ लेकर पेस्ट को उसमें मिला लें। दोनों को एक साथ छानने के बाद उसे मरीज को पिला दें।

7. बवासीर की दवा है गिलोय (Medicine For Piles)

गिलोय बवासीर के इलाज में काफी फायदेमंद रहता है। बवासीर या पाइल्स बेहद दर्दनाक होते हैं और इनसे जितनी जल्दी छुटकारा मिले, उतना ही बेहतर होता  है। गिलोय के इस्तेमाल से बनने वाली दवाएं बवासीर काफी  हद्द तक ठीक कर सकती हैं। ध्यान सिर्फ इस बात का रखना है कि निर्देशों और परहेज का विशेष ध्यान दिया जाए। बवासीर की दवा बनाने के लिए, धनिया के पत्ते, गिलोय और हरड़ को एक साथ बराबर मात्रा में पीस लें। इस मिश्रण की 20 ग्राम मात्रा लेकर आधा लीटर पानी में मिलाएं और उबालें। उबल जाने के बाद थोड़े से गुड़ के साथ इसका दिन में दो बार सेवन करें। गिलोय के फायदे (Giloy ke fayde) का पूरी तरह से लाभ उठाने के लिए  गिलोय का सही तरह से इस्तेमाल करना भी ज़रूरी होता है।

8. शरीर मे पाचन को ठीक करता है (Improves Digestion)

गिलोय के नियमित सेवन का एक अन्य लाभ ये भी है कि ये पाचन और पेट से संबंधित किसी भी समस्या को ठीक करता है। डाइजेशन की समस्या को दूर करने के लिए निम्नलिखित प्रकार से गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय,अतीश या अतिविषा और अदरक की जड़ को समान मात्रा में लें। तीनों सामग्रियों को एक साथ उबालकर काढ़ा बना लें। रोज 20-30 ग्राम की मात्रा में इस काढ़े का सेवन करने से पेट और पाचन संबंधी सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। गिलोय के फायदे (giloy ke fayde) का पूरी तरह से लाभ उठाने के लिए  गिलोय का सही तरह से इस्तेमाल करना भी ज़रूरी होता है

9. अन्य फायदे व लाभ
  • अगर किसी को अस्थमा की समस्या हो तो, उसे गिलोय की जड़ चबाने की सलाह दी जाती है। इससे सीने का कड़ापन दूर होता है और गले में घरघराहट, कफ आना और सांस से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है।
  • गिलोय आँखो की समस्या जैसे कॉर्निया डिसऑर्डर, मोतियाबिंद और स्कलेरल को भी ठीक करने में फ़ायदेमंद हो सकता है। 11.5 ग्राम गिलोय का जूस लेकर उसमें 1 ग्राम शहद और 1 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को आंखों के ऊपर लगाया जा सकता है।
  • यौनेच्छा को बढ़ाता है (Aphrodisiac)-गिलोय में एफ्रोडिजिक या यौनेच्छा को बढ़ाने वाले गुण पाए जाते हैं। ये आपकी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने में भी मदद करता है।
  • बढ़ती उम्र के लक्षण (Signs Of Aging)-गिलोय में एंटी एजिंग गुण पाए जाते हैं। ये डार्क स्पॉट्स, झुर्रियां, पिंपल्स या मुंहासे और महीन लाइनों को हटाने में मदद कर सकता है।
  • गिलोय में एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण पाए जाते हैं। ये गुण सांस की समस्याओं को कंट्रोल करने और दूर करने में मदद करता है।
  • मूत्र विकार या पेशाब की नली में होने वाली समस्याओं जैसे जलन का अनुभव होना या पेशाब करने में दर्द होने में गिलोय का सेवन बहुत फायदेमंद है।
  • प्राकृतिक औषधि गिलोय वात रोगों को दूर करने की उपयोगी औषधियों में से एक है। गिलोय के सत के साथ अरंडी का तेल मिलाएं और जहां जरूरत हो वहां लगाएं। कुछ ही दिनों में आपको मनचाहे नतीजे मिलने लगेंगे।
गिलोय के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Giloy?)
काढ़ा – 20-30 मिली
रस – 20 मिली
अधिक लाभ के लिए चिकित्सक के परामर्शानुसार इस्तेमाल करें।

Giloy

गिलोय के सेवन का तरीका (How to Use Giloy?)
काढ़ा
रस

गिलोय के नुकसान (Side Effects of Giloy)
गिलोय के लाभ की तरह गिलोय के नुकसान भी हो सकते हैंः- गिलोय डायबिटीज (मधुमेह) कम करता है। इसलिए जिन्हें कम डायबिटीज की शिकायत हो, वे गिलोय का सेवन न करें। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।







कबीर दास, एक रहस्यवादी कवि और भारत के महान संत, का जन्म वर्ष 1440 में हुआ था और वर्ष 1518 में देहांत हो गया था। कबीर पंथ एक विशाल धार्मिक समुदाय है जो संत मत के संप्रदाय के प्रवर्तक के रूप में कबीर की पहचान करता है। कबीर पंथ के सदस्यों को कबीर पंथियों के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने पूरे उत्तर और मध्य भारत में विस्तार किया था। कबीर दास के कुछ महान लेखन बीजक, कबीर ग्रंथावली, अनुराग सागर, सखी ग्रन्थि इत्यादि हैं। कबीर के दोहे काफी प्रसिद्ध हैं.

हमने कुछ बेहतरीन Sant Kabir Ke Dohe with meaning in Hindi आपके लिए इकट्ठे किये हैं |


Kabir Das Ji Ke Dohe

संत कबीर दास के दोहे हिंदी अर्थ सहित-


बुरा जो देखन मैं चला, बुरा मिलिया कोय,
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा कोय।

अर्थ :- जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा मिला. जब मैंने अपने मन में झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं है.


दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै कोय।
जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय

अर्थ :- कबीर दास जी कहते हैं कि दुःख के समय सभी भगवान् को याद करते हैं पर सुख में कोई नहीं करता। यदि सुख में भी भगवान् को याद किया जाए तो दुःख हो ही क्यों !


पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।

अर्थ :- बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़ कर संसार में कितने ही लोग मृत्यु के द्वार पहुँच गए, पर सभी विद्वान हो सके. कबीर मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले, अर्थात प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी होगा.


साईं इतना दीजिये, जा मे कुटुम समाय
मैं भी भूखा रहूँ, साधु ना भूखा जाय

अर्थ :- कबीर दस जी कहते हैं कि परमात्मा तुम मुझे इतना दो कि जिसमे बस मेरा गुजरा चल जाये , मैं खुद भी अपना पेट पाल सकूँ और आने वाले मेहमानो को भी भोजन करा सकूँ।


साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,
सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।

अर्थ :- इस संसार में ऐसे सज्जनों की जरूरत है जैसे अनाज साफ़ करने वाला सूप होता है. जो सार्थक को बचा लेंगे और निरर्थक को उड़ा देंगे.


एसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय
औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय

अर्थ :- अगर अपने भाषा से अहं को हटा दिया जाए, तो दूसरों के साथ खुद को भी शान्ति मिलती है।


लूट सके तो लूट ले,राम नाम की लूट
पाछे फिर पछ्ताओगे,प्राण जाहि जब छूट

अर्थ :- कबीर दस जी कहते हैं कि अभी राम नाम की लूट मची है , अभी तुम भगवान् का जितना नाम लेना चाहो ले लो नहीं तो समय निकल जाने पर, अर्थात मर जाने के बाद पछताओगे कि मैंने तब राम भगवान् की पूजा क्यों नहीं की


तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय,
कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।

अर्थ :- कबीर कहते हैं कि एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा करो जो तुम्हारे पांवों के नीचे दब जाता है. यदि कभी वह तिनका उड़कर आँख में गिरे तो कितनी गहरी पीड़ा होती है !


बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर
पंथी को छाया नही फल लागे अति दूर

अर्थ :-खजूर का पेड़ तो राही को छाया देता है, और ही उसका फल आसानी से पाया जा सकता है। इसी तरह, उस शक्ति का कोई महत्व नहीं है, जो दूसरों के काम नहीं सकती।


धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।

अर्थ :- मन में धीरज रखने से सब कुछ होता है. अगर कोई माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से सींचने लगे तब भी फल तो ऋतु आने पर ही लगेगा !


माला फेरत जुग भया, फिरा मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।

अर्थ :- कोई व्यक्ति लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की माला तो घुमाता है, पर उसके मन का भाव नहीं बदलता, उसके मन की हलचल शांत नहीं होती. कबीर की ऐसे व्यक्ति को सलाह है कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ कर मन के मोतियों को बदलो या फेरो.


जाति पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

अर्थ :- सज्जन की जाति पूछ कर उसके ज्ञान को समझना चाहिए. तलवार का मूल्य होता है कि उसकी मयान काउसे ढकने वाले खोल का.


दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त,
अपने याद आवई, जिनका आदि अंत।

अर्थ :-यह मनुष्य का स्वभाव है कि जब वह दूसरों के दोष देख कर हंसता है, तब उसे अपने दोष याद नहीं आते जिनका आदि है अंत.


जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ,
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।

अर्थ :-जो प्रयत्न करते हैं, वे कुछ कुछ वैसे ही पा ही लेते हैं जैसे कोई मेहनत करने वाला गोताखोर गहरे पानी में जाता है और कुछ ले कर आता है. लेकिन कुछ बेचारे लोग ऐसे भी होते हैं जो डूबने के भय से किनारे पर ही बैठे रह जाते हैं और कुछ नहीं पाते.


बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि,
हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि।

अर्थ :-यदि कोई सही तरीके से बोलना जानता है तो उसे पता है कि वाणी एक अमूल्य रत्न है। इसलिए वह ह्रदय के तराजू में तोलकर ही उसे मुंह से बाहर आने देता है.


अति का भला बोलना, अति की भली चूप,
अति का भला बरसना, अति की भली धूप।

अर्थ :- तो अधिक बोलना अच्छा है, ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है. जैसे बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं और बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं है.

निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय,
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।

अर्थ :- जो हमारी निंदा करता है, उसे अपने अधिकाधिक पास ही रखना चाहिए। वह तो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बता कर हमारे स्वभाव को साफ़ करता है.


निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय,
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।

अर्थ :- जो हमारी निंदा करता है, उसे अपने अधिकाधिक पास ही रखना चाहिए। वह तो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बता कर हमारे स्वभाव को साफ़ करता है.


दुर्लभ मानुष जन्म है, देह बारम्बार,
तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि लागे डार।

अर्थ :- इस संसार में मनुष्य का जन्म मुश्किल से मिलता है. यह मानव शरीर उसी तरह बार-बार नहीं मिलता जैसे वृक्ष से पत्ता झड़ जाए तो दोबारा डाल पर नहीं लगता.


कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती, काहू से बैर.

अर्थ :- इस संसार में आकर कबीर अपने जीवन में बस यही चाहते हैं कि सबका भला हो और संसार में यदि किसी से दोस्ती नहीं तो दुश्मनी भी हो !


हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना,
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम कोउ जाना।

अर्थ :- कबीर कहते हैं कि हिन्दू राम के भक्त हैं और तुर्क (मुस्लिम) को रहमान प्यारा है. इसी बात पर दोनों लड़-लड़ कर मौत के मुंह में जा पहुंचे, तब भी दोनों में से कोई सच को जान पाया।


कहत सुनत सब दिन गए, उरझि सुरझ्या मन.
कही कबीर चेत्या नहीं, अजहूँ सो पहला दिन.

अर्थ :- कहते सुनते सब दिन निकल गए, पर यह मन उलझ कर सुलझ पाया. कबीर कहते हैं कि अब भी यह मन होश में नहीं आता. आज भी इसकी अवस्था पहले दिन के समान ही है.


कबीर लहरि समंद की, मोती बिखरे आई.
बगुला भेद जानई, हंसा चुनी-चुनी खाई.

अर्थ :- कबीर कहते हैं कि समुद्र की लहर में मोती आकर बिखर गए. बगुला उनका भेद नहीं जानता, परन्तु हंस उन्हें चुन-चुन कर खा रहा है. इसका अर्थ यह है कि किसी भी वस्तु का महत्व जानकार ही जानता है।


जब गुण को गाहक मिले, तब गुण लाख बिकाई.
जब गुण को गाहक नहीं, तब कौड़ी बदले जाई.

अर्थ :- कबीर कहते हैं कि जब गुण को परखने वाला गाहक मिल जाता है तो गुण की कीमत होती है. पर जब ऐसा गाहक नहीं मिलता, तब गुण कौड़ी के भाव चला जाता है.


कबीर कहा गरबियो, काल गहे कर केस.
ना जाने कहाँ मारिसी, कै घर कै परदेस.

अर्थ :- कबीर कहते हैं कि हे मानव ! तू क्या गर्व करता है? काल अपने हाथों में तेरे केश पकड़े हुए है. मालूम नहीं, वह घर या परदेश में, कहाँ पर तुझे मार डाले.


पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात.
एक दिना छिप जाएगा,ज्यों तारा परभात.

अर्थ :- कबीर का कथन है कि जैसे पानी के बुलबुले, इसी प्रकार मनुष्य का शरीर क्षणभंगुर है।जैसे प्रभात होते ही तारे छिप जाते हैं, वैसे ही ये देह भी एक दिन नष्ट हो जाएगी.


हाड़ जलै ज्यूं लाकड़ी, केस जलै ज्यूं घास.
सब तन जलता देखि करि, भया कबीर उदास.

अर्थ :- यह नश्वर मानव देह अंत समय में लकड़ी की तरह जलती है और केश घास की तरह जल उठते हैं. सम्पूर्ण शरीर को इस तरह जलता देख, इस अंत पर कबीर का मन उदासी से भर जाता है.


जो उग्या सो अन्तबै, फूल्या सो कुमलाहीं।
जो चिनिया सो ढही पड़े, जो आया सो जाहीं।

अर्थ :- इस संसार का नियम यही है कि जो उदय हुआ है,वह अस्त होगा। जो विकसित हुआ है वह मुरझा जाएगा. जो चिना गया है वह गिर पड़ेगा और जो आया है वह जाएगा.


झूठे सुख को सुख कहे, मानत है मन मोद.
खलक चबैना काल का, कुछ मुंह में कुछ गोद.

अर्थ :- कबीर कहते हैं कि अरे जीव ! तू झूठे सुख को सुख कहता है और मन में प्रसन्न होता है? देख यह सारा संसार मृत्यु के लिए उस भोजन के समान है, जो कुछ तो उसके मुंह में है और कुछ गोद में खाने के लिए रखा है.


ऐसा कोई ना मिले, हमको दे उपदेस.
भौ सागर में डूबता, कर गहि काढै केस.

अर्थ :- कबीर संसारी जनों के लिए दुखित होते हुए कहते हैं कि इन्हें कोई ऐसा पथप्रदर्शक मिला जो उपदेश देता और संसार सागर में डूबते हुए इन प्राणियों को अपने हाथों से केश पकड़ कर निकाल लेता.


संत ना छाडै संतई, जो कोटिक मिले असंत
चन्दन भुवंगा बैठिया, तऊ सीतलता तजंत।

अर्थ :- सज्जन को चाहे करोड़ों दुष्ट पुरुष मिलें फिर भी वह अपने भले स्वभाव को नहीं छोड़ता. चन्दन के पेड़ से सांप लिपटे रहते हैं, पर वह अपनी शीतलता नहीं छोड़ता.


कबीर तन पंछी भया, जहां मन तहां उडी जाइ.
जो जैसी संगती कर, सो तैसा ही फल पाइ.

अर्थ :- कबीर कहते हैं कि संसारी व्यक्ति का शरीर पक्षी बन गया है और जहां उसका मन होता है, शरीर उड़कर वहीं पहुँच जाता है। सच है कि जो जैसा साथ करता है, वह वैसा ही फल पाता है.


तन को जोगी सब करें, मन को बिरला कोई.
सब सिद्धि सहजे पाइए, जे मन जोगी होइ.

अर्थ :- शरीर में भगवे वस्त्र धारण करना सरल है, पर मन को योगी बनाना बिरले ही व्यक्तियों का काम है य़दि मन योगी हो जाए तो सारी सिद्धियाँ सहज ही प्राप्त हो जाती हैं.


कबीर सो धन संचे, जो आगे को होय.
सीस चढ़ाए पोटली, ले जात देख्यो कोय.

अर्थ :- कबीर कहते हैं कि उस धन को इकट्ठा करो जो भविष्य में काम आए. सर पर धन की गठरी बाँध कर ले जाते तो किसी को नहीं देखा.


माया मुई मन मुआ, मरी मरी गया सरीर.
आसा त्रिसना मुई, यों कही गए कबीर .

अर्थ :- कबीर कहते हैं कि संसार में रहते हुए माया मरती है मन. शरीर जाने कितनी बार मर चुका पर मनुष्य की आशा और तृष्णा कभी नहीं मरती, कबीर ऐसा कई बार कह चुके हैं.


मन हीं मनोरथ छांड़ी दे, तेरा किया होई.
पानी में घिव निकसे, तो रूखा खाए कोई.

अर्थ :- मनुष्य मात्र को समझाते हुए कबीर कहते हैं कि मन की इच्छाएं छोड़ दो , उन्हें तुम अपने बूते पर पूर्ण नहीं कर सकते। यदि पानी से घी निकल आए, तो रूखी रोटी कोई खाएगा.


काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में प्रलय होएगी,बहुरि करेगा कब

अर्थ :-कबीर दास जी समय की महत्ता बताते हुए कहते हैं कि जो कल करना है उसे आज करो और और जो आज करना है उसे अभी करो , कुछ ही समय में जीवन ख़त्म हो जायेगा फिर तुम क्या कर पाओगे |


माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख
माँगन ते मारना भला, यह सतगुरु की सीख

अर्थ :- माँगना मरने के बराबर है ,इसलिए किसी से भीख मत मांगो . सतगुरु कहते हैं कि मांगने से मर जाना बेहतर है , अर्थात पुरुषार्थ से स्वयं चीजों को प्राप्त करो , उसे किसी से मांगो मत।


आछे दिन पाछे गए, हरि से किया हेत
अब पछताए होत क्या, चिड़िया चुग गयी खेत

अर्थ :- सुख के समय में भगवान् का स्मरण नहीं किया, तो अब पछताने का क्या फ़ायदा। जब खेत पर ध्यान देना चाहिए था, तब तो दिया नहीं, अब अगर चिड़िया सारे बीज खा चुकी हैं, तो खेद से क्या होगा।


आपा तजे हरि भजे, नख सिख तजे विकार
सब जीवन से निर्भैर रहे, साधू मता है सार

अर्थ :- जो व्यक्ति अपने अहम् को छोड़कर, भगवान् कि उपासना करता है, अपने दोषों को त्याग देता है, और किसी जीव-जंतु से बैर नहीं रखता, वह व्यक्ति साधू के सामान और बुद्धिमान होता है।


आवत गारी एक है, उलटन होय अनेक
कह कबीर नहिं उलटिये, वही एक की एक

अर्थ :- अगर गाली के जवाब में गाली दी जाए, तो गालियों की संख्या एक से बढ़कर अनेक हो जाती है। कबीर कहते हैं कि यदि गाली को पलटा जाय, गाली का जवाब गाली से दिया जाय, तो वह गाली एक ही रहेगी


बाहर क्या दिखलाये , अंतर जपिए राम |
कहा काज संसार से , तुझे धानी से काम ||

अर्थ :- बाहरी दिखावे कि जगह, मन ही मन में राम का नाम जपना चाहिए। संसार कि चिंता छोड़कर, संसार चलाने वाले पर ध्यान देना चाहिए।


भगती बिगाड़ी कामिया , इन्द्री करे सवादी |
हीरा खोया हाथ थाई , जनम गवाया बाड़ी ||

अर्थ :- इच्छाओं और आकाँक्षाओं में डूबे लोगों ने भक्ति को बिगाड़ कर केवल इन्द्रियों की संतुष्टि को लक्ष्य मान लिया है। इन लोगों ने इस मनुष्य जीवन का दुरूपयोग किया है, जैसे कोई हीरा खो दे।


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बूँद पड़ी जो समुंदर में, जानत है सब कोय
समुंदर समाना बूँद में, बूझै बिरला कोय

अर्थ :- एक बूँद का सागर में समानायह समझना आसान है, लेकिन सागर का बूँद में समानाइसकी कल्पना करना बहुत कठिन है। इसी तरह, सिर्फ भक्त भगवान् में लीन नहीं होते, कभी-कभी भगवान् भी भक्त में समा सकते हैं।


चली जो पुतली लौन की, थाह सिंधु का लेन
आपहू गली पानी भई, उलटी काहे को बैन

अर्थ :- जब नमक सागर की गहराई मापने गया, तो खुद ही उस खारे पानी मे मिल गया। इस उदाहरण से कबीर भगवान् की विशालता को दर्शाते हैं। जब कोई सच्ची आस्था से भगवान् खोजता है, तो वह खुद ही उसमे समा जाता है।


चिड़िया चोंच भरि ले गई, घट्यो नदी को नीर
दान दिये धन ना घटे, कहि गये दास कबीर

अर्थ :- जिस तरह चिड़िया के चोंच भर पानी ले जाने से नदी के जल में कोई कमी नहीं आती, उसी तरह जरूरतमंद को दान देने से किसी के धन में कोई कमी नहीं आती


चिंता ऐसी डाकिनी, काट कलेजा खाए
वैद बेचारा क्या करे, कहा तक दवा लगाए

अर्थ :-चिंता एक ऐसी चोर है जो सेहत चुरा लेती है। चिंता और व्याकुलता से पीड़ित व्यक्ति का कोई इलाज नहीं कर सकता।


दया भाव ह्रदय नहीं, ज्ञान थके बेहद |
ते नर नरक ही जायेंगे , सुनी सुनी साखी शब्द ||

अर्थ :- कुछ लोगों में दया होती है और हमदर्दी, मगर वे दूसरों को उपदेश देने में माहिर होते हैं। ऐसे व्यक्ति, और उनका निरर्थक ज्ञान नर्क को प्राप्त होता है।


कबीर दास के दोहे


गुरु गोविंद दोनों खड़े, काके लागूं पाँय
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो मिलाय

अर्थ :- यदि गुरु और ईश्वर, दोनों साथ में खड़े हों, तो किसे पहले प्रणाम करना चाहिए? कबीर कहते हैं, गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर है, क्योंकि गुरु की शिक्षा के कारण ही भगवान् के दर्शन होते हैं


ज्ञानी मूल गँवाईया, आप भये करता
ताते संसारी भला, जो सदा रहे डरता

अर्थ :- जो विद्वान अहंकार में पड़कर खुद को ही सर्वोच्च मानता है, वह कहीं का नहीं रहता। उससे तो वह संसारी आदमी बेहतर है, जिसके मन में भगवान् का दर तो है।


हरि रस पीया जानिये, कबहू जाए खुमार
मैमता घूमत फिरे, नाही तन की सार

अर्थ :- जिस व्यक्ति ने परमात्मा के अमृत को चख लिया हो, वह सारा समय उसी नशे में मस्त रहता है। उसे अपने शरीर कि, ही रूप और भेष कि चिंता रहती है।


जबही नाम हिरदे घरा, भया पाप का नाश
मानो चिंगरी आग की, परी पुरानी घास

अर्थ :- शुद्ध हृदय के साथ भगवान् को याद करने से सारे पाप ऐसे नष्ट हो जाते हैं, जैसे कि सूखी घास पर आग की चिंगारी पड़ी हो।


जग में बैरी कोई नहीं , जो मन शीतल होय |
यह आपा तो डाल दे , दया करे सब कोए ||

अर्थ :- आपके मन में यदि शीतलता है, अर्थात दया और सहानुभूति है, तो संसार में आपकी किसी से शत्रुता नहीं हो सकती। इसलिए अपने अहंकार को निकाल बाहर करें, और आप अपने प्रति दूसरों में भी समवेदना पाएंगे।


जहाँ दया तहाँ धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप
जहाँ क्रोध तहाँ पाप है, जहाँ क्षमा तहाँ आप

अर्थ :- जहाँ दया-भाव है, वहाँ धर्म-व्यवहार होता है। जहाँ लालच और क्रोध है वहाँ पाप बसता है। जहाँ क्षमा और सहानुभूति होती है, वहाँ भगवान् रहते हैं।


जहाँ जाको गुन लहै, तहाँ ताको ठाँव
धोबी बसके क्या करे, दीगम्बर के गाँव

अर्थ :- जहाँ पर आपकी योग्यता और गुणों का प्रयोग नहीं होता, वहाँ आपका रहना बेकार है। उदाहरण के लिए, ऐसी जगह धोबी का क्या काम, जहाँ पर लोगों के पास पहनने को कपड़े नहीं हैं।


दुःख में सुमिरन सब करें सुख में करै कोय
जो सुख में सुमिरन करे तो दुःख काहे होय

अर्थ :-दुःख में परमात्मा को सभी याद करते हैं, परन्तु सुख में कोई नहीं। यदि सुख में भी परमात्मा को याद रखते, तो दुःख होता ही नहीं।


जैसा भोजन खाइये, तैसा ही मन होय
जैसा पानी पीजिये, तैसी वाणी होय

अर्थ :-  शुद्ध-सात्विक आहार तथा पवित्र जल से मन और वाणी पवित्र होते हैं। अर्थात, जो जैसी संगति करता है वैसा ही बन जाता है।


ज्यों तिल मांही तेल है, ज्यों चकमक में आग
तेरा साईं तुझमे है, तू जाग सके तो जाग

अर्थ :- जिस तरह तिल में तेल होता है, और पत्थरों से आग उत्पन्न हो सकती है, उसी प्रकार भगवान् भी आपके अंतर्गत हैं। उन्हें जगाने की शक्ति पैदा करने की आवश्यकता है।


कबीर क्षुधा कूकरी, करत भजन में भंग
वाकूं टुकडा डारि के, सुमिरन करूं सुरंग

अर्थ :- संत कबीरदास कहते हैं कि भूख ऐसी कुतिया के समान होती है, जो कि भजन साधना में बाधा डालती है। इसे शांत करने के लिए अगर समय पर रोटी का टुकडा दे दिया जाए तो फिर संतोष और शांति के साथ ईश्वर का स्मरण हो सकता है।


कबीरा गर्व ना कीजिये, ऊंचा देख आवास
काल पड़ो भू लेटना, ऊपर जमसी घास

अर्थ :- अपना शक्ति और संपत्ति देख कर घमंडी मत बनिए। जब इस शरीर से आत्मा निकल जाती हैं तो सबसे शक्तिशाली मनुष्य का देह भी धरती में दाल दिया जाता है, और उसके ऊपर घास उग जाती है।


कबीरा सोया क्या करे, उठि भजे भगवान
जम जब घर ले जाएँगे, पड़ा रहेगा म्यान

अर्थ :- अपना सारा समय सोते हुए मत बिताइए। भगवान् को याद कीजिये, क्योंकि यमराज के आने पर (अर्थात मृत्यु के समय ), बिन आत्मा का यह शरीर उस तरह होगा, जैसे बिना तलवार के म्यान।


कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर

अर्थ :- जो लोग गुरु और भगवान् को अलग समझते हैं, वे सच नहीं पहचानते। अगर भगवान् अप्रसन्न हो जाएँ, तो आप गुरु की शरण में जा सकते हैं। लेकिन अगर गुरु क्रोधित हो जाएँ, तो भगवान् भी आपको नहीं बचा सकते।


कबीरा तेरी झोपडी, गल कटीयन के पास
जैसी करनी वैसे भरनी, तू क्यों भया उदास

अर्थ :- कबीर ! तेरा घर कसाई के पास है तो क्या ? उसकी हरकतों के लिए तू ज़िम्मेदार नहीं है। अर्थात, अपने कर्मों का फल सबको खुद ही भुगतना पड़ता है।


कबीरा यह तन जात है, सके तो ठौर लगा |
कई सेवा कर साधू की, कई गोविन्द गुण गा ||

अर्थ :- हर व्यक्ति कि मृत्यु तो निश्चित है। इसीलिए अपना जीवन काल उचित एवं लाभकारी कामों में लगाना चाहिए, जैसे कि साधुओं की सेवा और भगवान् कि भक्ति।


कहे कबीर कैसे निबाहे, केर बेर को संग
वह झूमत रस आपनी, उसके फाटत अंग

अर्थ :- कबीर कहते हैं कि विभिन्न प्रकृति के लोग एक साथ नहीं रह सकते। उदाहरण के लिए, केले और बेर का पेड़ साथ नहीं उग सकते, क्योंकि जब हवा से बेर का पेड़ हिलेगा तो उसके काँटों से केले के पत्ते नष्ट हो जायेंगे।


करनी बिन कथनी कथे, अज्ञानी दिन रात
कूकर सम भूकत फिरे, सुनी सुनाई बात

अर्थ :- अज्ञानी व्यक्ति काम कम और बातें अधिक करते हैं। ऐसे लोग खुद अपना तर्क रखने के बजाय सुनी सुनाई बातों को ही रटते रहते हैं।


केसों कहा बिगडिया, जे मुंडे सौ बार
मन को काहे मूंडिये, जा में विशे विकार

अर्थ :- जो लोग धार्मिक कारणों से बार-बार मुंडन करते हैं, कबीर उनसे पूछतें हैं , कि बालों को किस बात की सज़ा दे रहे हो, जो उन्हें निरंतर मुंडाते रहते हो? इसकी जगह, अपने मन को साफ़ करो, जिसमे बुराईयाँ भरी हुई हैं। अर्थात, अपने विचारों पर ध्यान दो, केवल अनुष्ठानों और क्रियायों पर नहीं।


खाय पकाय लूटाय ले, करि ले अपना काम
चलती बिरिया रे नरा, संग चले छदाम

अर्थ :- मनुष्य को इस जीवन में अपनी शक्ति और साधन का भरपूर प्रयोग करना चाहिएअपने कामों के लिए, दूसरों कि सहायता के लिए और परोपकार के कार्यों में। इस तरह उसे अपना जीवन सार्थक करना चाहिए, क्योंकि संसार से जाते समय एक भी वस्तु उसके साथ नहीं जायेगी।


कोइ एक राखै सावधां, चेतनि पहरै जागि
बस्तर बासन सूं खिसै, चोर सकई लागि

अर्थ :- जो हर पहर जागता रहता है, उसके कपड़े और बर्तन कोई नहीं ले जा सकता। अर्थात, हमेशा सचेत और सावधान रहना चाहिए।


कुटिल बचन सबसे बुरा , जासे हॉट हार |
साधू बचन जल रूप है , बरसे अमृत धार ||

अर्थ :- कटु शब्दों और तानों से बदन में जलन की भावना होती है, जब कि मधुर शब्द सुनकर ठंडक पहुँचती है, और ऐसा लगता है कि जैसे अमृत बरस रहा हो


क्या मुख ली बिनती करो , लाज आवत है मोहि |
तुम देखत ओगुन करो , कैसे भावो तोही ||

अर्थ :- हे भगवान् ! तुझसे प्रार्थना करते हुए मुझे शर्म आती है। क्या तुम मेरी गलतियों और मेरे पापों के बावजूद मुझे अपना सकते हो?


मान बड़ाई देखि कर, भक्ति करै संसार।
जब देखैं कछु हीनता, अवगुन धरै गंवार।।

अर्थ :- दूसरों की देखादेखी कुछ लोग सम्मान पाने के लिये परमात्मा की भक्ति करने लगते हैं, पर जब वह नहीं मिलता तब वह मूर्खों की तरह इस संसार में ही दोष निकालने लगते हैं।


माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगी तोय

अर्थ :- मिट्टी कुम्हार से कहती है कि आज तो तू मुझे पैरों के नीचे रोंद रहा है, लेकिन एक दिन ऐसा आएगा, कि तू मेरे तले होगा | अर्थात, जीवन में मनुष्य चाहे जितना भी शक्तिशाली हो, मृत्यु के बाद उसका शरीर मिट्टी हो जाता है |


माला तो कर में फिरे, जीभ फिरे मुख माहि
मनुआ तो चहुं दिश फिरे, यह तो सुमिरन नाहि

अर्थ :- माला घुमाने से, या मंत्रो का उच्चारण करने से ध्यान नहीं होता। अर्थात ध्यान होता है मन को स्थिर करने से, क्रियाएं करने से नहीं।


मन उन्मना तोलिये, शब्द के मोल तोल
मुर्ख लोग जान्सी, आपा खोया बोल

अर्थ :- अशांत या व्याकुल अवस्था में किसी के कही हुई बातों का अर्थ नहीं निकलना चाहिए। ऐसी हालत में व्यक्ति शब्दों का सही अर्थ समझने में असमर्थ होता है। मूर्ख लोग इस तथ्य को नहीं जानते, इसलिए किसी भी बात पर अपना संतुलन खो देते हैं


मुख से नाम रटा करैं, निस दिन साधुन संग
कहु धौं कौन कुफेर तें, नाहीं लागत रंग

अर्थ :- रात दिन भगवान के नाम जपने, और रोज़ साधुओं के साथ संगत करने के बावजूद, कुछ लोगों पर भक्ति का रंग नहीं चढ़ता, क्योंकि वे अपने अंदर के विकारों से मुक्त नहीं हो पाते।


न्हाये धोये क्या हुआ, जो मन मैल जाय
मीन सदा जल में रहै, धोये बास जाय

अर्थ :- बार बार नहाने से कुछ नहीं होता, अगर मन साफ़ हो। अर्थात, बाहरी उपस्थिति से ज़यादा महत्वपूर्ण है मानव का चरित्र और उसका स्वभाव। उदाहरण के लिए, मछली सारी ज़िन्दगी पानी में रहती है, परधुलनहीं पातीउसमे बदबू फिर भी आती है।


पांच पहर धंधा किया, तीन पहर गया सोय |
एक पहर भी नाम बिन, मुक्ति कैसे होय ||

अर्थ :- दिन के आठ पहर में, आप पाँच पहर काम करते हैं, और तीन पहर सोते हैं। अगर ईश्वर को याद करने के लिए आपके पास समय ही नहीं है, तो आपको मोक्ष कैसे मिल सकता है ?


पाथर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजू पहाड़
घर की चाकी कोई ना पूजे, जाको पीस खाए संसार

अर्थ :- कबीर कहते हैं कि अगर पत्थर की मूर्ती की पूजा करने से भगवान् मिल जाते तो वे पहाड़ कि पूजा कर लेते। लेकिन मूर्तियों से महत्वपूर्ण वो चक्की है, जिसमे पिसा हुआ अन्न लोगों का पेट भरता है। अर्थात परम्पराओं और प्रथाओं के साथ-साथ अपने काम का भी ध्यान रखना चाहिए।


पढी गुनी पाठक भये, समुझाया संसार
आपन तो समुझै नहीं, वृथा गया अवतार

अर्थ :- कुछ लोग बहुत पढ़-लिखकर दूसरों को उपदेश देते हैं, लेकिन खुद अपनी सीख ग्रहण नहीं करते। ऐसे लोगों की पढ़ाई और ज्ञान व्यर्थ है।



पहिले यह मन काग था, करता जीवन घात
अब तो मन हंसा, मोती चुनि-चुनि खात

अर्थ :- कबीर कहते हैं कि मनुष्य का मन एक कौआ की तरह होता है, जो कुछ भी उठा लेता है। लेकिन एक ग्यानी का मन उस हंस के समान होता है जो केवल मोती खाता है।


पर नारी का राचना, ज्यूं लहसून की खान
कोने बैठे खाइये, परगट होय निदान

अर्थ :- पराई स्त्री के साथ प्रेम प्रसंग करना लहसून खाने के समान है। उसे चाहे कोने में बैठकर खाओ पर उसकी गंध दूर तक फैल जाती है। अर्थात, इसे छुपाना असंभव है।


पहले शब्द पहचानिये, पीछे कीजे मोल
पारखी परखे रतन को, शब्द का मोल ना तोल

अर्थ :- पहले शब्दों का अर्थ पूरी तरह से समझिये। उसके बाद ही उनके कारण या महत्व का विश्लेषण करिये। जौहरी भी केवल रत्नो को तोल सकता है, शब्दों को मापना बहुत कठिन है।


फल कारन सेवा करे , करे ना मन से काम |
कहे कबीर सेवक नहीं , चाहे चौगुना दाम
||

अर्थ :- कुछ लोग भगवान् का ध्यान फल और वरदान की आशा से करते हैं, भक्ति के लिए नहीं। ऐसे लोग भक्त नहीं, व्यापारी हैं, जो अपने निवेश का चैगुना दाम चाहते हैं।


प्रेम बड़ी उपजी, प्रेम हात बिकाय |
राजा प्रजा जोही रुचे , शीश दी ले जाय ||

अर्थ :- प्रेम खरीदा जा सकता है, और ही इसकी फ़सल उगाई जा सकती है। प्रेम के लिए विनम्रता आवश्यक है, जाहे राजा हो या कोई सामान्य व्यक्ति।


प्रेम प्याला जो पिए, शीश दक्षिणा दे|
लोभी शीश दे सके, नामप्रेम का ले ||

अर्थ :- जो प्रेम का अनुभव करना चाहता है, उसे अपना जीवन न्योछावर करने के लिए तैयार होना चाहिए। लालची और स्वार्थी मनुष्य कुछ भी त्यागने में असमर्थ हैंवे प्रेम की कँवल बातें कर सकते हैं, अनुभव नहीं।


प्रेमभाव एक चाहिए, भेष अनेक बनाय |
चाहे घर में वास कर , चाहे बन को जाए ||

अर्थ :- व्यक्ति हे हृदय में प्रेम होना चाहिए, उसका रूप या अवस्था चाहे जो भी होचाहे वो महल में रहे या जंगल में।


रात गवई सोय के दिवस गवाया खाय |
हीरा जन्म अनमोल था, कौड़ी बदले जाय ||

अर्थ :- जो व्यक्ति इस संसार में बिना कोई कर्म किए पूरी रात को सोते हुए और सारे दिन को खाते हुए ही व्यतीत कर देता है वह अपने हीरे तुल्य अमूल्य जीवन को कौड़ियों के भाव व्यर्थ ही गवा देता है


साधू भूखा भाव का, धन का भूखा नाही
धन का भूखा जो फिरे, सो तो साधू नाही

अर्थ :- संत केवल भाव ज्ञान की इच्छा रखते हैं। उन्हें धन का कोई लोभ नहीं होता। जो व्यक्ति साधू बनकर भी धन-संपत्ति के पीछे भागता है, वह संत नहीं हो सकता।


सतगुरु की महिमा अनँत, अनँत किया उपगार
लोचन अनँत उघारिया, अनँत दिखावनहार ।।

अर्थ :- सद्गुरु की महिमा अनन्त है और उनके उपकार भी अनन्त हैं। उन्होंने मेरी अनन्त दृष्टि खोल दी जिससे मुझे उस अनन्त प्रभु का दर्शन प्राप्त हो गए।


सतगुरु मिला तो सब मिले, ना तो मिला कोय
मात पिता सूत बान्धवा, यह तो घर घर होय

अर्थ :- जिसने एक सच्चा गुरु पा लिया, उसने मानो सारा संसार पा लिया। माता, पिता, बच्चे और दोस्त तो सभी के होते हैं, लेकिन गुरु का भाग्य सबको नहीं मिलता।


श्रम से ही सब कुछ होत है, बिन श्रम मिले कुछ नाही
सीधे ऊँगली घी जमो, कबसू निकसे नाही

अर्थ :- जिस तरह जमे हुए घी को सीधी ऊँगली से निकलना असम्भव है, उसी तरह बिना मेहनत के लक्ष्य को प्राप्त करना सम्भव नहीं है


सोना सज्जन साधू जन , टूट जुड़े सौ बार |
दुर्जन कुम्भ कुम्हार के , एइके ढाका दरार ||

अर्थ :- सोने को अगर सौ बार भी तोड़ा जाए, तो भी उसे फिर जोड़ा जा सकता है। इसी तरह भले मनुष्य हर अवस्था में भले ही रहते हैं। इसके विपरीत बुरे या दुष्ट लोग कुम्हार के घड़े की तरह होते हैं जो एक बार टूटने पर दुबारा कभी नहीं जुड़ता।


सुख मे सुमिरन ना किया, दु: में करते